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बसंत पंचमी कब है ? बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है ? vasant panchami kab hai


Vasant Panchami Kab Hai ? Vasant Panchami Kyu Manaya Jata Hai ?

बसंत पंचमी कब है ? बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है ?

 

हेल्लो दोस्तों कैसे है आपलोग ? खाबरिदुनियां (KhabariDuniyaaa) में आपका स्वागत है | आज में आपको बताने वाला हूँ बसंत पंचमी के बारे में जिसे हम सरस्वती पूजा भी कहते हैं | की बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है , बसंत पंचमी कब है, बसंत पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त कब हैं, वसंत पंचमी का महत्व, वसंत पंचमी का ऐतिहासिक महत्व, वसंत पंचमी का पौराणिक महत्व, देवी सरस्वती पूजा विधि, सरस्वती पूजा में इस्तेमाल होने वाली पूजा सामग्रियां, सरस्वती पूजन के लिए हवन विधि, सरस्वती पूजा विसर्जन विधि के बारे में |

 

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    बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है
    ?

    Vasant Panchami Kyu Manaya Jata Hai ?

    आइये अब हम जानते हैं की इस त्यौहार को क्यों मनाया जाता है | हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, वसंत पंचमी के दिन को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का जन्म हुआ था | सरस्वती माँ को ज्ञान, संगीत और कला की देवी भी कहा जाता है | इसिलए श्रद्धालु माँ सरस्वती की सच्चे मन से पूजा व अर्चना करते हैं | ऐसा कहा जाता हैं की वसंत पंचमी के दिन ही ब्रह्मांड की रचना हुई थी | इस दिन वसंत का भी आगमन होता है जो की हम सब के जीवन में बीच खुशी का आगमन होता है |

     

    बसंत पंचमी कब है ?

    Vasant Panchami Kab Hai ?

    हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष यानी 2021 में, बसंत पंचमी (Vasant panchami) 16 फरवरी (मंगलवार) को दुनियाभर में धूमधाम से मनाई जाएगी |

     

     

    बसंत पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त कब हैं ?

    Basant Panchami Ka Shubh Muhurat Kab Hai ?

    एस्ट्रोसेज के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य की मानें तो, इस वर्ष बसंत पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 59 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक, यानी करीब 05 घंटे 36 मिनट का रहने वाला है |

     

    देवी सरस्वती का जन्म(उत्पत्ति) कैसे हुआ था ?

    Devi Sarwasati Ka Utpati Kaise Huaa Tha ?

    ऐसे हुआ था मां सरस्वती का जन्म

    यदि हम हिंदू मान्यताओं के अनुसार बात करे तो, भगवान विष्णु की आज्ञा से इसी दिन ब्रह्मा जी ने मनुष्य योनि की रचना की थी, लेकिन शुरू में इन्सान बोलना नहीं जानता था।

     

    उस समय धरती पर सब शांत और नीरस था । ब्रह्मा जी ने जब धरती को इस स्थिति में देखा तो अपने कमंडल से जल छिड़कर एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री (सरस्वती) को प्रकट किया।

     

    जिसके हाथों में वीणा थी । इस शक्ति को ही ज्ञान की देवी मां सरस्वती कहा गया। मां सरस्वती ने जब अपनी वीणा का तार छेड़ा तो तीनों लोकों में कंपन हो गया और सबको शब्द तथा वाणी (आवाज) मिल गई।

     

    अतः यही कारण है कि इस दिन मां सरस्वती का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का पूजन करने से ज्ञान की पूर्ण प्राप्ति होती है।

     

     

    वसंत पंचमी का महत्व :-

    Vasant Panchami Ka Mahatv

    वसंत पंचमी को वसंत ऋतु की शुरुआत माना जाता हैं । कहा जाता हैं की इस दिन से वसंत ऋतु शुरू होती हैं और मर जाएगी प्रकृति वापस से एक पर अपने सुंदर अवतार में आना प्रारंभ हो जाती हैं ।

     

    भारतीय मान्यताओं के अनुसार Vasant Panchami के दिन से ही भयंकर सर्दियां कम होने लग जाती हैं और पढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बनना प्रारम्भ हो जाता हैं । 

     

    वसंत ऋतु को भारत में पाई जाने वाली 6 ऋतुओं में से सबसे श्रेष्ठ माना जाता हैं क्योंकि वसंत ऋतु के आते ही प्रकृति में एक नई सी उमंग आने लगती हैं।

     

    वसंत ऋतु के आते ही इंसान ही नहीं बल्कि पशु व पक्षी भी एक अलग ही उल्लास में रंग जाते हैं।  वसंत ऋतु प्रकृति को समर्पित मानी जाती है क्योंकि वसंत ऋतु में पेड़ो पर नए पत्ते आने लगते हैं।

    और पौधों में कलिया आने लगती हैं जो आगे जाकर सुंदर फूल बनकर आसपास के वातावरण को महकाती हैं।

     

    वसंत ऋतु की पढ़ने के लिए और कला अध्ययन के लिये सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता हैं और इस वजह से यह दिन ज्ञानी व कलाप्रेमी लोगो के लिए बहुत महत्व रखता हैं।

     

    यह दिन कलाकारों के लिए और ज्ञानियों के लिए साल के सभी त्योहारों से अधिक बढ़कर होता हैं। 

    इस दिन कला व विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा की जाती है और उनसे ज्ञान के क्षेत्र और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मनोकामना की जाती हैं।

     

    कहा जाता है कि जितना महत्व दुकानदारों और व्यवसाय करने वालों के लिए दीवाली का होता है उतना महत्व कलाकारों और विद्वानों के लिए Vasant Panchami का होता हैं ।

     

     

    वसंत पंचमी का पौराणिक महत्व :-

    Vasant Panchami Ka Pauraanik Mahatv

    इसके साथ ही यह पर्व हमें अतीत की अनेक प्रेरक घटनाओं की भी याद दिलाता है। सर्वप्रथम तो यह हमें त्रेता युग से जोड़ती है । रावण द्वारा सीता के हरण के बाद श्रीराम उसकी खोज में दक्षिण की ओर बढ़े। इसमें जिन स्थानों पर वे गये, उनमें दण्डकारण्य भी था। यहीं शबरी नामक भीलनी रहती थी। जब राम उसकी कुटिया में पधारे, तो वह सुध-बुध खो बैठी और चख-चखकर मीठे बेर राम जी को खिलाने लगी । प्रेम में पगे जूठे बेरों वाली इस घटना को रामकथा के सभी गायकों ने अपने-अपने ढंग से प्रस्तुत किया ।

     

    दंडकारण्य का वह क्षेत्र इन दिनों गुजरात और मध्य प्रदेश में फैला है। गुजरात के डांग जिले में वह स्थान है जहां शबरी मां का आश्रम था। वसंत पंचमी के दिन ही रामचंद्र जी वहां आये थे। उस क्षेत्र के वनवासी आज भी एक शिला को पूजते हैं, जिसके बारे में उनकी श्रध्दा है कि श्रीराम आकर यहीं बैठे थे। वहां शबरी माता का मंदिर भी है।

     

     

    वसंत पंचमी का ऐतिहासिक महत्व :-

    Vasant Panchami Ka Aitihaasik Mahatv

    1.  पृथ्वीराज चौहान की याद में

    चौहानों में भी बसंत पंचमी को लेकर काफी लोकप्रिय मान्यता प्रचलित है।  कहा जाता है कि वीर पृथ्वीराज चौहान ने गोरी नामक मुस्लिम शासक को 16 बार हराया और हर बार उन्होंने अपने हिंदुत्व का पालन करते हुए अपने शत्रु को माफ कर दिया। 

    लेकिन 17वीं बार में मुस्लिम शासक गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

    कुछ इतिहासकारों की मान्यता है कि मुस्लिम शासक गोरी ने बदले की आग में पृथ्वीराज चौहान की दोनों आंखें फोड़ दी और जब उन्हें फांसी के फंदे पर लटकाया जाना था उस समय मनोरंजन के लिए पृथ्वीराज चौहान से शब्दभेदी बाण की कला दिखाने की फरमाइश की । 

    पृथ्वीराज चौहान ने अपने साथी चंदबरदाई की मदद से अपने शब्दभेदी बाण से गोरी को ही मार दिया और यह दिन वसंत पंचमी का ही दिन था ।

     

    2.  गुरु गोबिन्द सिंह जी का विवाह में

    सिखों के लिए में बसंत पंचमी के दिन का बहुत महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी का विवाह हुआ था।

     

    3.  वीर हकीकत की याद में

    वसंत पंचमी का लाहौर निवासी वीर हकीकत से भी गहरा सम्बन्ध है। एक दिन जब मुल्ला जी किसी काम से विद्यालय छोड़कर चले गये, तो सब बच्चे खेलने लगे, पर वह पढ़ता रहा। जब अन्य बच्चों ने उसे छेड़ा, तो दुर्गा मां की सौगंध दी। मुस्लिम बालकों ने दुर्गा मां की हंसी उड़ाई। हकीकत ने कहा कि यदि में तुम्हारी बीबी फातिमा के बारे में कुछ कहूं, तो तुम्हें कैसा लगेगा?बस फिर क्या था, मुल्ला जी के आते ही उन शरारती छात्रों ने शिकायत कर दी कि इसने बीबी फातिमा को गाली दी है। फिर तो बात बढ़ते हुए काजी तक जा पहुंची। मुस्लिम शासन में वही निर्णय हुआ, जिसकी अपेक्षा थी। आदेश हो गया कि या तो हकीकत मुसलमान बन जाये, अन्यथा उसे मृत्युदंड दिया जायेगा। हकीकत ने यह स्वीकार नहीं किया। परिणामत: उसे तलवार के घाट उतारने का फरमान जारी हो गया।

     

    कहते हैं उसके भोले मुख को देखकर जल्लाद के हाथ से तलवार गिर गयी। हकीकत ने तलवार उसके हाथ में दी और कहा कि जब मैं बच्चा होकर अपने धर्म का पालन कर रहा हूं, तो तुम बड़े होकर अपने धर्म से क्यों विमुख हो रहे हो? इस पर जल्लाद ने दिल मजबूत कर तलवार चला दी, पर उस वीर का शीश धरती पर नहीं गिरा। वह आकाशमार्ग से सीधा स्वर्ग चला गया। यह घटना वसंत पंचमी (23.2.1734) को ही हुई थी। पाकिस्तान यद्यपि मुस्लिम देश है, पर हकीकत के आकाशगामी शीश की याद में वहां वसन्त पंचमी पर पतंगें उड़ाई जाती है। हकीकत लाहौर का निवासी था। अतः पतंगबाजी का सर्वाधिक जोर लाहौर में रहता है।

     

    4.  गुरू रामसिंह कूका की याद में

    वसंत पंचमी हमें गुरू रामसिंह कूका की भी याद दिलाती है। उनका जन्म 1816 ई. में वसंत पंचमी पर लुधियाना के भैणी ग्राम में हुआ था। कुछ समय वे महाराजा रणजीत सिंह की सेना में रहे, फिर घर आकर खेतीबाड़ी में लग गये, पर आध्यात्मिक प्रवृत्ति होने के कारण इनके प्रवचन सुनने लोग आने लगे। धीरे-धीरे इनके शिष्यों का एक अलग पंथ ही बन गया, जो कूका पंथ कहलाया।

     

    गुरू रामसिंह, गोरक्षा, स्वदेशी, नारी उद्धार, अन्तरजातीय विवाह, सामूहिक विवाह आदि पर बहुत जोर देते थे। उन्होंने भी सर्वप्रथम अंग्रेजी शासन का बहिष्कार कर अपनी स्वतंत्र डाक और प्रशासन व्यवस्था चलायी थी। प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर भैणी गांव में मेला लगता था। 1872 में मेले में आते समय उनके एक शिष्य को मुसलमानों ने घेर लिया। उन्होंने उसे पीटा और गोवध कर उसके मुंह में गोमांस ठूंस दिया। यह सुनकर गुरू रामसिंह के शिष्य भड़क गये। उन्होंने उस गांव पर हमला बोल दिया, पर दूसरी ओर से अंग्रेज सेना आ गयी। अतः युद्ध का पासा पलट गया।

     

    इस संघर्ष में अनेक कूका वीर शहीद हुए और 68 पकड़ लिये गये। इनमें से 50 को सत्रह जनवरी 1872 को मलेरकोटला में तोप के सामने खड़ाकर उड़ा दिया गया। शेष 18 को अगले दिन फांसी दी गयी। दो दिन बाद गुरू रामसिंह को भी पकड़कर बर्मा की मांडले जेल में भेज दिया गया। 14 साल तक वहां कठोर अत्याचार सहकर 1885 ई. में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया।

     

    5.  राजा भोज का जन्म दिवस के याद में

    राजा भोज का जन्मदिवस वसंत पंचमी को ही आता हैं। राजा भोज इस दिन एक बड़ा उत्सव करवाते थे जिसमें पूरी प्रजा के लिए एक बड़ा प्रीतिभोज रखा जाता था जो चालीस दिन तक चलता था।

    वसन्त पंचमी हिन्दी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्मदिवस (28.02.1899) भी है। निराला जी के मन में निर्धनों के प्रति अपार प्रेम और पीड़ा थी। वे अपने पैसे और वस्त्र खुले मन से निर्धनों को दे डालते थे। इस कारण लोग उन्हें 'महाप्राण' कहते थे। इस दिन जन्मे लोग कोशिश करे तो बहुत आगे जाते है ।

     

    देवी सरस्वती पूजा विधि :-

    Vasant Panchami Puja Vidhi

    Vasant Panchami पूजा विधि

    माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, वसंत पंचमी के रूप में सर्वविदित है । इस दिन ज्ञान, वाणी और ललित कलाओं की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है । सरस्वती पूजन का उद्देश्य जीवन में अज्ञानरुपी अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश उत्त्पन्न  करना है ।

     

    बसंत पंचमी पूजा विधि की बात करें तो लोग सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करते हैं और उसके बाद पीले स्वच्छ व पवित्र वस्त्र धारण करते हैं ।  

     

    इसके बाद उत्तर दिशा में पाटन लगाकर और उस पर लाल व पीले वस्त्र बिछाकर शुद्ध चावल यानी कि अक्षत की मदद से अष्ट कमल मनाया जाता है ।

     

    श्वेत फूल-माला के साथ माता को सिन्दूर व अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित किया जाता है  । वसंत पंचमी के दिन माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित करने का विधान है।

     

     

    सरस्वती पूजा में इस्तेमाल होने वाली पूजा सामग्रियां

    Sarwsati Puja Me instemal Hone Wali Puja Samagri

    सत्वगुण से उत्पन्न होने के कारण इनकी पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियां अधिकांशः  श्वेत वर्ण की होती हैं जैसे श्वेत चन्दन , श्वेत वस्त्र , फूल , दही-मक्खन , सफ़ेद तिल का लड्डू , अक्षत , घृत , नारियल और इसका जल , श्रीफल , बेर इत्यादि ।

     

    प्रसाद में माँ को पीले रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाएं जाते है । यथाशक्ति ''ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः '' का जाप करें । माँ सरस्वती का बीजमंत्र '' ऐं '' है जिसके उच्चारण  मात्र से ही बुद्धि विकसित होती है ।

     

    अष्ट कमल के अग्रभाग में गणेश जी को स्थापित किया जाता है । सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है और उसके बाद प्रतिभा कामदेव की पूजा की जाती है ।

     

    कुछ प्रदेशों में गणेश जी की पूजा के बाद सरस्वती की पूजा की जाती है और उन्हें सरसों, गेहूं आदि अन्य चढ़ाए जाते हैं।

     

     

    सरस्वती पूजन के लिए हवन विधि :

    Sarwsati Puja Ke Liye Havan Vidhi

    सरस्वती पूजा करने बाद सरस्वती माता के नाम से हवन करना चाहिए | हवन के लिए हवन कुण्ड अथवा भूमि पर सवा हाथ चारों तरफ नापकर एक निशान बना लेना चाहिए | अब इस भूमि को कुशा से साफ करके गंगा जल छिड़ककर पवित्र करें और यहां पर हवन करें | हवन करते समय गणेश जी, नवग्रह के नाम से हवन करें | इसके बाद सरस्वती माता के नाम से 'ओम श्री सरस्वत्यै नम: स्वहा" इस मंत्र से एक सौ आठ बार हवन करना चाहिए | हवन के बाद सरस्वती माता की आरती करें और हवन का भभूत लगाएं |

     

     

    सरस्वती पूजा विसर्जन विधि

    Saraswati Puja Visarjan Vidhi

    माघ शुक्ल पंचमी के दिन सरस्वती की पूजा के बाद षष्ठी तिथि को सुबह माता सरस्वती की पूजा करने के बाद उनका विसर्जन कर देना चाहिए | संध्या काल में मूर्ति को प्रणाम करके जल में प्रवाहित कर देना चाहिए |

     

     

    होली का शुभारंभ

    Holi Ka SubhaArambh

    बृज क्षेत्र में वसंत पंचमी के दिन से होली का शुभारंभ हो जाता है। चौराहों पर होलिका दहन के लिए लकड़ी एकत्र करने के बाद गुलाल उड़ाया जाता है। जो फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक उमंग के साथ लगातार चलता रहता है ।

     

    आज हमने क्या सिखा :

    Taught Today :

    आज हमने सिखा की Vasant panchami kyu manaya jata hai, Vasant panchami kab Hai, Basant Panchami Ka Shubh Muhurat Kab Hai, Vasant Panchami Ka Mahatv, Vasant Panchami Ka Pauraanik Mahatv, Vasant Panchami Ka Aitihaasik Mahatv, Vasant Panchami Puja Vidhi, Sarwsati Puja Me instemal Hone Wali Puja Samagri, Sarwsati Puja Ke Liye Havan Vidhi, Saraswati Puja Visarjan Vidhi |


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